रेपिस्टों के एनकाउंटर से देश क्यों खुश? - खबरदार जमुई

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Friday, December 6, 2019

रेपिस्टों के एनकाउंटर से देश क्यों खुश?


रेपिस्टों के एनकाउंटर से देश क्यों खुश है आपको रांची की एक घटना से समझनी चाहिए। रांची के एक इलाके में मजदूर परिवार की एक 7 साल की बच्ची से अधेड़ रेप करता है। किराना दुकान चलाने वाला व्यक्ति टॉफी की लालच में ऐसा करता है। उस वक्त बच्ची को कुछ पता नहीं चलता है। वह अधेड़ कई बार ऐसा करता है। घटना के लगभग 3 से 4 महीने बीत जाते हैं। बच्ची की मां स्कूल जाने के लिए एक दिन बच्ची का कपड़ा बदल रही थी तो उसके पेट फुले हुए दिखे। परिवार वालों ने सोचा खाना पचा नहीं होगा। कुछ दिन उसे इग्नोर किया जाता है फिर उस बच्ची की तबियत बिड़गने लगी तो डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टर ने बच्ची के प्रीग्नेंट होने की बात बतलाई। घर वाले परेशान हो गए। बच्ची को घर लाया गया और पूछा गया तो उसने बताया कि किराना दुकान वाले अंकल उसे टॉफी देकर ऐसा करते थे। मामला थाना पहुंचा। आरोपी जेल चला गया। लेकिन उस बच्ची का क्या जिसके पेट में बच्चा था। डॉक्टर ने सलाह दिया कि एबॉर्शन करवाने पर बच्ची की जान जा सकती है। बच्ची ने कई महीनों तक कष्ट सहकर गुप्त स्थान पर रहकर बच्चे को जन्म दिया। जन्म के साथ ही महानगर का रहने वाला एक परिवार बच्चे को गोद ले लिया। बच्ची उस सदमे से कभी बाहर नहीं निकल सकी। फिलहाल वह 12 वीं कक्षा की छात्रा है। और आरोपी जेल से बाहर। पूरी घटना बताने के दौरान उसकी आंखों में खून दौड़ रहा था। जब उससे पूछा गया कि आज वह व्यक्ति सामने आ जाये तो क्या करोगी। जिस बिस्तर पर वह बैठी थी उसके बेडशीट को अपने मुट्ठी में जोर से समेटते हुए कहती है जान से मार दूंगी। पूछने पर की तुम्हे भी तो सज़ा होगी वह कहती है सज़ा मंजूर है। वह अब अपने उस बच्चे का भी मुंह नहीं देखना चाहती। उसे अफसोस इस बात का भी है उसे इस हाल में पहुंचाने वाला व्यक्ति अभी भी उसके सामने से हर रोज गुजरता है।
रिपोर्ट-सन्नी शारद राँची में एक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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