गांधी विशेष में आज पढ़ें डॉ.सत्यम भास्कर की ये कविता। - खबरदार जमुई

Breaking

Chat With Us

Wednesday, October 2, 2019

गांधी विशेष में आज पढ़ें डॉ.सत्यम भास्कर की ये कविता।


ओ गांधी फिर से आ जाओ, 

ओ गांधी फिर से आ जाओ,
अहिंसा का पाठ पढा़  जाओ,
लूट मार मची है हर ओर,
इनको देश धर्म का आईना दिखा जाओ।

सत्याग्रह से दांडी यात्रा तक,
पोरबन्दर से डरबन तक,
कारागार से चरखे तक,
मोहनदास से महात्मा तक,
असहयोग से तिरंगे की आज़ादी तक,
सत्य, अहिंसा, देशभक्ति,
एक बार सबक सिखा जाओ।

अजानबाहु साबरमती के संत,
मारामारी की होड़ लगी फैला चहुँ ओर छल प्रपंच,
राजनीति और राजनेताओं से आए अब दुर्गंध,
विकट त्रासदी का काम है ऐसा करते तुम पर भी तंज,
बिमार दुषित के लिए करदो कुछ प्रबंध,
अब तो आ भी जाओ बापू मेरे संत।

सत्य के मार्ग पर चलना सिखा गया लाठी वाला,
स्वच्छता का पाठ पढा़ गया वो श्याम रंग वाला,
अहिंसा के राह पर चलना बता गया वो हिम्मतवाला,
खादी कीमत बता गया वो चरखा वाला,
वो असाधारण मानव एक युग था स्वयं में,
आभास करा गया वो धोती वाला।

अंग्रेजी हुकूमत की ईंट से ईंट बजा दी,
ऐसी मुंहतोड़ उनको सज़ा दी,
चम्पारण की गली शहर में,
क्रांति की ऐसी हवा चला दी,
संयमित, नियमित, अनुशासित,
देखते ही देखते अपनी जमात बना ली,
रातोंरात अंग्रेज़ों की नींद उड़ा दी।

प्राकृतिक चिकित्सा उनकी थी सभ्यता,
गांधी बनने में युग है लगता,
एकमात्र उनका हथियार सिर्फ सत्यता,
तीन बंदरों का पाठ कर रही याद अब तक जनता,
ऐसी थी उनकी विद्वत्ता।


     

Written by-
Dr. Satyam K. Bhaskar
Senior consultant physiotherapist,
HOD Rahul memorial hospital Gr. Noida.
Senior lecturer, Nutrition and Natural Health Sciences Association, New Delhi.
Executive Committee member, Physiotherapy Foundation of India.
      

No comments:

Post a Comment