चुनाइरस का चक्कर,अनजाने में कहीं न बन जाएं शिकार। - खबरदार जमुई

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Thursday, April 18, 2019

चुनाइरस का चक्कर,अनजाने में कहीं न बन जाएं शिकार।


सावधान! ‘चुनाइरस’ तेजी से फैल रहा है, बचकर रहें! कहीं अनजाने में आप इसके शिकार न बन जाएं। ‘चुनाइरस’ नहीं समझे आप? ‘चुनाइरस’ यानी चुनावी वाइरस। एक बार आप इसके शिकार हुए नहीं कि जिन्दगी भर इससे मुक्त नहीं हो पाएँगे। अगर आपको मेरी बातों का यकीन न हो तो आप खुद ही देख सकते हैं। चुनाव नजदीक आते ही पार्टी कार्यालयों, प्रेस कार्यालयों, चौक-चौराहों और अन्य सार्वजनिक जगहों पर बरसाती मेढ़कों की तरह झुंड के झुंड एक विशेष प्रकार की मनःस्थिति वाले व्यक्ति नजर आने लगते हैं। यह मनःस्थिति एक संक्रामक बीमारी की तरह होता है। धीरे-धीरे पूरा समाज इसके संक्रमण का शिकार हो जाता है। कुछ वयक्ति तो मौसम के बीतते ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ स्थायी रूप से इसी मनःस्थिति का शिकार होकर पक्के ‘चुनावी’ बन जाते हैं। ध्यान देने की बात है कि अगर कोई व्यक्ति शौकिया तौर पर एक दो बार चुनाव लड़ता है या फिर चुनाव के दौरान कोई काम करता है, तो वह चुनावी नहीं कहला सकता है। जैसे की कभी-कभार शराब पीने वाला शराबी नहीं कहलाता है।
‘चुनाइरस’ पीड़ित के ‘पंच अकार लक्षण’ –
असहज- पूरे चुनाव के दौरान ये सहज नहीं रह पाते हैं।
आत्मकेन्द्रित- जीवन पर्यन्त ये आत्मकेन्द्रित रहते हैं। दूसरों के लिए सोचते नहीं सिर्फ सोचने का दिखावा करते हैं।
ईश्वरीय- ये खुद को ईश्वर से कम नहीं समझते हैं।
उल्लूकीय- उल्लू की भांति जनता को उजाले में नजर नहीं आते।
एकांतप्रिय- यह लक्षण चुनाव के प्रकट होता है। क्रमशः जारी......
लेखक अवनींद्र झा राष्ट्रीय अख़बार के जिला सम्पादक हैं।

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