जेट को डुबोने में राजनीतिक शक्तियां भी हैं! - खबरदार जमुई

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Thursday, April 18, 2019

जेट को डुबोने में राजनीतिक शक्तियां भी हैं!


लगभग 25 साल बाद जेट एयरवेज के बंद होने के साथ ही एक युग का अंत हो गया. जेट के विमान आज रात से अस्थायी तौर पर बंद कर दिए गए हैं. हो सकता है अब आपको कभी भी जेट के विमान न दिखें. जेट पर भारी कर्ज संकट था. कर्ज तले दबे इस विमानन कंपनी की स्थिति ऐसी हो गई थी कि उसके पास न तो अपने पायलट और कर्मचारियों को देने के लिए पैसे थे, न किराए पर लिए गए विमान को देने के लिए पैसे, न ही उसने अब तक बैंको का कर्ज चुकाया है. यही नहीं हालात इतने खराब हो गए थे कि कंपनी के पास विमान ईंधन भरवाने के भी पैसे नहीं थे. हाल ही में कई बार तेल कंपनियों ने बिना ईंधन डाले विमान को लौटा दिया. 

जेट के बंद होने से तकरीबन 20 हजार लोगों की नौकरी पर बन आई है. जिन पायलटों की तीन महीने से ज्यादा की सैलरी बकाया है वे मैनेजमेंट से गुहार लगाने के बाद अब दूसरे एयरलाइन कंपनी में नौकरी खोज रहे हैं. खबरों के मुताबिक, जेट के कई कर्मचारियों को स्पाइसजेट 50 फीसद कम वेतन पर अपने वहां रख रहा है. बेकार से बेगार भला. क्या करें परिवार पालना है तो सड़क पर आने से बेहतर है कहीं लगे रहें फंसे रहें. जेट 2017 में भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी थी.

जेट के पास कुल 123 विमानों का बेड़ा था. धीरे धीरे बंद होते होते कल तक उसके बेड़े में बस 5 विमान बच गए थे. कहा जा रहा है कि जेट के बंद होने के राजनीतिक कनेक्शन भी हैं. नरेश गोयल का उदय कांग्रेस पार्टी के शासन काल में हुआ था। लेकिन 2014 में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार आने के बाद इसकी समस्याएं शुरू हो गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की सहयोगी शिवसेना के साथ जेट एयरवेज के मैनेजमेंट के संबंध अच्छे नहीं हैं। इसने बीजेपी से कहा है कि जेट को सरकार की तरफ से कोई मदद न दी जाए।

जेट में मुंबई की एक सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे एनसीपी नेता के भी पैसे लगे हैं। बताया जा रहा है कि एनआरआई नरेश गोयल के पास इतने पैसे हैं कि अकेले जेट को संकट से उबार सकते हैं। लेकिन ज्यादातर पैसा कालेधन में है। उनका दुबई और लंदन में होटल चेन है। इसलिए जब एयरलाइन बंद होने के कगार पर है, वह चाहते हैं कि बैंक ही कर्मचारियों की सैलरी का खर्च उठाएं।
लेखक नितेश त्रिपाठी दिल्ली में जानेमाने पत्रकार हैं।

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