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Saturday, April 20, 2019

खूबसूरत बहाने कश्मीरी आतंकियों के,भगवा आतंक और परिवारवाद?


बचपन में एक बार चांटा लगा इसलिए आतंकी बन गया
लड़की के घर वालों ने मना कर दिया इसलिए आतंकी बन गया

जितने खूबसूरत बहाने कश्मीरी आतंकियों को मिले वैसे कथित भगवा आतंकियो को नहीं मिले। किसी ने ये कहकर बचाव नहीं किया कि मनमोहन सरकार मंदिरों और त्योंहारों पर बाजारों को सुरक्षा नहीं दे पाई इसलिए प्रतिक्रियावादी विचार दूसरी तरफ से उठ खड़ा हुआ।

अब जब 10 साल प्रताड़ना झेलने के बाद कर्नल पुरोहित अपनी यूनिट ज्वाइन कर चुके हैं, असीमानंद बरी हो चुके हैं और साध्वी प्रज्ञा भी लगभग सारे में मामलों में क्लीनचिट पा चुकी हैं इसके बावजूद कोई नहीं कह रहा मकोका कानून को समाप्त कर दिया जाए जैसे पोटा के साथ किया गया था।

2002 में फ्रंटलाइन ने पहली बार 'भगवा आतंकवाद' नाम से लेख लिखा गया था। लेकिन तब बात नहीं बन पाई इस शब्द ने पहचान मिली दशक भर बाद।  कुछ मामलों की प्राथमिक जांच ने पाकिस्तान की तरफ इशारा किया लेकिन वो बाद में जांच 'भगवा आतंक' की तरफ मुड़ गई। समझौता एक्सप्रेस धमाके के आरोपी रहे स्वामी असीमानंद ने अपने बयान में यहां तक कह दिया कि उन्हें धमाके करने के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आदेश दिया था हालांकि बाद में  अपने बयान से मुकर गए और उन्होंने जबरदस्ती बयान लेने का आरोप लगा दिया।

इस देश में गांधी परिवार के सामने एक ही परिवार चुनौती है और वो है संघ परिवार। जो संविधान संघ ने सरदार को सौंपा था उसके अनुसार सिर्फ संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ही संघ का प्रतिनिधित्व करती है अगर वो कुछ गलत करते हैं तभी उसके लिए एक संगठन के तौर पर संघ को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है और अब निशाने पर सीधे संघ प्रमुख मोहन भागवत और केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रैश जी थे। जो कुछ हो रहा था उस पर संघ की भी नज़र थी। आतंक से जोड़े जाने पर संघ ने देश का सभी 400 से ज्यादा जिलों में एक दिन का विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस उतावलेपन में संघ और बीजेपी से आगे बढ़कर पहले भगवा और फिर हिन्दू तक इन मामलों को जोड़ गई। मोहन भागवत जी ने मंच से कहा था हम इतना बड़ा जन आंदोलन खड़ा कर देंगे जिसकी कल्पना भी कांग्रेस ने कभी नहीं की होगी।

गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सभा में कह दिया कि भाजपा और संघ आतंकी ट्रैनिंग कैंप चलाते हैं जब बीजेपी ने संसद में उनसे जवाब मांगा तो वो मुकर गए। 2004 से लेकर 2009 तक जब देश के हर बड़े शहर में आतंकी हमले हुए तब पाकिस्तान को घेरने की जगह भारत ये साबित करने में लगा था संघ और बीजेपी आतंकी संगठन है या नहीं। तालिबान ने भारत को धमकी दी की अगर भारत ने आतंकी संगठन खत्म नहीं किए तो वो कश्मीर पर हमला कर देगा। पाकिस्तान पूरी दुनिया को बता रहा था जो हमले भारत में हुए हैं वो तो भारतीयों ने ही किए हैं।

कांग्रेसी नेता इस पर किताब लिखकर हमें बता रहे थे कि मुंबई हमलों के पीछे संघ है। वो तो तुकाराम ओम्‍बले ने कलावा बांधे कसाब को जिंदा पकड़ लिया वरना एक थ्योरी और चल सकती थी।

इस दौरान एक नेता और भी था जिसे लगता था कि कांग्रेस और बीजेपी मिली हुई हैं।

पांच साल पहले संघ पर आतंक का आरोप था पांच साल बाद आधा कांग्रेस नेतृत्व जमानत पर है। जो मिले होने का आरोप लगाते थे वो आज खुद कांग्रेस से मिलने के लिए मरे जा रहे हैं।

बीच में खड़े है गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मणि और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह जिन्होंने ये सब बहुत करीब से देखा और बाद में काफी से विस्तार से बताया।

भोपाल में जो होने जा रहा है वो चुनाव नहीं है.....

जनता अपना फैसला सुनाएगी हिन्दू-भगवा आतंकवाद जैसी किसी बात पर वो विश्वास करती है या नहीं
लेखक अविनाश त्रिपाठी जो दिल्ली में पत्रकार हैं और युवा ब्लॉगर हैं।

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