क्या आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं,कहीं आपमें यूरिक एसिड की अधिकता तो नहीं!तो ये ख़बर आपके लिए। - खबरदार जमुई

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Tuesday, December 4, 2018

क्या आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं,कहीं आपमें यूरिक एसिड की अधिकता तो नहीं!तो ये ख़बर आपके लिए।

आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हमारी जीवनशैली रोज प्रभावित हो रही है।जहाँ एक तरफ भारत युवाओं का देश कहा जाता है,भारत को बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में पहचान मिल रही है वहीं दूसरी तरफ हर रोज़ एक नई बीमारी दस्तक दे रही है।भारत रोगियों के क्रम में तीसरे पायदान पर है।आज हम इसी मुद्दे पर आपके सामने लेकर आये हैं एक ऐसी बीमारी जो हमारी जीवन को खासा प्रभावित की हुई है,जो पुरातन में वृद्धावस्था की पहचान कही जाती थी मगर बदलते जीवनशैली और अनियमित हो रहे खानपान के कारण अब ये बीमारी आमतौर पर युवाओं ने भी देखी जा रही है।             हम बात कर रहे हैं जॉइंट पैन की जिसे आमभाषा में जोड़ों का दर्द या गठिया रोग भी कहते हैं ये एक ऐसी बीमारी है जिससे लोग काफी परेशान रहते हैं और बेतरतीब दर्द से कराहते रहते हैं।जोड़ों के दर्द को बुढ़ापे की पहचान मानी जाती थी मगर आजकल ये अमूमन युवावस्था में भी देखने को अक्सर मिल जाती है। इसी का एक उदाहरण हैं अखिल जिन्होंने बताया की एक दिन ऑफिस में अचानक उनकी कलाइयों पर तेज़ दर्द महसूस हुआ,इन्हें लगा की ये पिछले दिनों की एक दुर्घटना में चोट की वज़ह से हो रही है लेकिन दर्द इतना बेतहाशा था की वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे और तुरंत डॉक्टर से दिखाने चला गया,डॉक्टर ने कुछ एक्सरे और खून टेस्ट कराने की बात कही,जब जाँच हुई तो ये गठिया का लक्षण बताया गया,इनके रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा 9.1 mg/dl थी जो सामान्य से कहीं अधिक थी,जबकि सामन्यतः एक स्वस्थ्य जीवन के लिए यूरिक एसिड की मात्रा  पुरुषों में 3-7 mg/dl और महिलाओं में 2.5-6 mg/dl होनी चाहिए।

   ये घटना अमूमन पुरे विश्व में फैली है,अगर भारत की बात की जाए तो 18 करोड़ से अधिकलोग इस बीमारी से ग्रसित हैं जो समूर्ण आबादी का 14 फीसदी है और एक  अनुमान के मुताबिक 2025 तक ये संख्या बढ़कर 6 करोड़ हो सकती है जो विश्व में अलग देश बनाने जितना है।

आज हम इसी शीलशिले पर बात करेंगे की आखिर क्यों क्या और कैसे होटी है ये बीमारी क्या हैं इसके लक्षण और इलाज़। आप इस रिपोर्ट को अंत तक पढ़ें।

सबसे पहले जानते हैं यूरिक एसिड और गठिया के बारे में...

क्या होता है यूरिक एसिड और कैसे बनता है गठिया का कारण-


यूरिक अम्ल एक कार्बनिक यौगिक है जो कार्बन, हाईड्रोजन, आक्सीजन और नाईट्रोजन तत्वों से बना होता है। यह शरीर को प्रोटीन से एमिनो अम्ल के रूप में प्राप्त होता है, जो मनुष्य के भोजन बनता है। शरीर को आवश्यकता के हिसाब से इसे ग्रहण कर शेष अवशेष किडनी और मूत्राशय के द्वारा यह ब्लड से छन कर बाहर निकल जाता।
यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होने से शरीर के विभिन्न जोड़ जैसे हाथ पैर और घुटनों के जोड़ों  में क्रिस्टल बनने लगता है और एक मज़बूत जकड़न का निर्माण करते हैं जिसे गठिया कहते हैं और कभी कभी तो इसकी अधिकता के कारण पथरी और किडनी तक फ़ैल हो जाने की सम्भावना बन जाती है।
जिससे हाथ,पैर, केहुनी और और उँगलियों में बेतरतीब दर्द होने लगता है।

क्या कारण है यूरिक एसिड बढ़ने का- 


हम बात कर रहे हैं गठिया की और गठिया की सक्रियता की सबसे बड़ी वज़ह है यूरिक एसिड का बढ़ जाना अब सवाल उठता है आखिर यूरिक एसिड किन कारणों से अनियंत्रित होती है तो इस जानकारी के लिए आपको बता दें की इस बीमारी का हमारे फॅमिली इतिहास यानि की जेनिटिक्स से कोई वास्ता नहीं है अमूमन इसकी वज़ह अनियमित, अनियंत्रित,तंग हो रहे जीवनशैली से है। रोज का तनावपूर्ण जीवन और अधिक मात्रा में अल्कोह का सेवन इस बिमारी की मुख्य वजह है साथ ही साथ अधिक मांसाहार भी यूरिक एसिड को बढ़ाती है।
कभी कभी रोगी ये समझ नहीं पाते हैं और असहज दर्द अपने आप सामान्य हो जाता है जिससे लोग विचलित होते रहते हैं।
            पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में गठिया के लक्षण बहुत देखे जाते हैं इसका कारण महिलाओं में पाया जाने वाला एस्ट्रोजन हार्मोन है जो यूरिक एसिड के स्रवण को बढ़ाता है और महिलाओं में ये बीमारी सामन्यतः पायी जाती हैं।

कुछ केस में यह ज़रूरी नहीं है की यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से ही गठिया रोग होते हैं,मेटाबोलिक क्रिया और अनुवांशिकता भी इसके लक्षण को प्रकट करते हैं।


क्या हैं इसके लक्षण-

इसका सामान्य लक्षण जोड़ो में दर्द होना,सूजन आ जाना,लाल धब्बे निकल आना दर्द का स्थान गर्म हो जाना और कड़ा हो जाना है।यह धीरे धीरे शरीर के अन्य जोड़ों को भी प्रभावित कर के फैलते जाते हैं।

उपचार एवं इलाज-

डॉक्टरों की राय माने तो  नियमित और सही भोजन के ज़रिये आप अपने शरीर से यूरिक एसिड को कम और नियंत्रित कर सकते हैं साथ ही सही मेडिसिन भी इसके लिए जरुरी होता है।
आज बाजार में बहुत सारी दवाइयाँ मौज़ूद हैं जो पुरानी दवाओं से कहीं ज़्यादा असरकारक है।
वहीं वैकल्पिक उपचार के तौर पर  प्राचीन आयुर्वेदा में दवाओं के साथ पंचकर्मा थैरेपी एक सटीक उपचार है।नियमित खानपान और सही जीवनशैली इस समस्या का निदान है।
प्रकृति आयुर हेल्थ बेंगलुरु के डॉ. प्रकृति बताती हैं कि हम हर रोगियों को पंचकर्मा उपचार की सलाह देते हैं जिसमें मरीजों को एक दवा दी जाती है जिसे घी के मिश्रण में हमारे संरक्षण में खिलाई जाती है साथ ही शरीर की मालिश की जाती है जो गठिया के लिए एक कारगर उपचार सिद्ध होता है।
इस उपचार और सही खानपान को लगतार जारी रखने के 3 महीने ही असरकारक शाबित होने लगती है,साथ ही डॉक्टर के सुझाये दवाओं का भी सेवन इस रोग के लिए असरदार सिद्ध होता है।

खानपान पर ध्यान और व्यायाम है ज़रूरी-



सही खानपान और नियमित व्यायाम से गठिया को काफी हद तक नियंत्रण में लाया जा सकता है।साथ ही वजन अगर बढ़ा हो तो  इसे घटाने का प्रयास करें वज़न न बढ़ने दें इसे घटाकर रक्त से यूरिक एसिड को कम किया जा सकता है। ग़लत खानपान,व्यसन से दूर रहें।कम कैलोरी वाला पौष्टिक भोजन लें,रोज़ाना नियमित व्यायाम करें।ध्यान रहे वैसा भोजन न करें जिससे शरीर में प्यूरीन की मात्रा बढ़े और यह वसा और यूरिक एसिड को बड़ा दे।
डॉक्टरों का कहना है की इस समय मरीज़ को विटामिन-c का सेवन करने के साथ साथ व्यायाम को अपने दैनिक जीवन में ज़रूर शामिल करें।
लेख-रवि मिश्रा
The ज्ञानम academy जमुई।

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